घोर हा नको फार कष्टलो |
निजहितास मी व्यर्थ गुंतलो |
वारि शीघ्र संसार यातना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १ ||
विषय गोड हे लागले मला |
यामुळे असे घात आपुला |
कळुनिया असें भ्रांति जाईना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || २ ||
त्रिविध ताप हा जाळितो अती |
काम क्रोध हे जाण पीडती |
चित्त सर्वथा स्वस्थ राहिना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ३ ||
स्त्रीधनादि हे आठवे मनी |
छंद हाच रे दिवसयामिनी |
विसरलो तुला दीनपालना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ४ ||
माउली पिता बंधुसोयरा |
तूंचि आमुचा निश्चये खरा |
शरण तूज मी विघ्नभंजना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ५ ||
म्हणवितो तुझा दास या जनी |
सकळ व्यापका जाणशी मनी |
भुक्ती मुक्ती दे भक्तपालना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ६ ||
काय काय रे साधनें करू |
मी असे तुझे मूर्ख लेकरु |
विटंबिती मला द्वैतभावना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ७ ||
विषयचिंतनें शोक पावलों |
देह बुध्दीने व्यर्थ नाडलों |
भालचंद्रजी तोड़ी बंधना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ८ ||
गजमुखा तुझी वाट पहातां |
नेत्र शीणले जाण तत्त्वतां |
भेटसी कधी भ्रमनिवारणा |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ९ ||
प्रभु समर्थ तू आमुचे शिरी |
वेष्टिलों असे विषयापामरीं |
नवल हेंचि रे वाटते मना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १० ||
अगुण अद्वया तू परात्परा |
पार नेणवे विधि हरीहरां |
अचल निर्मला नित्य निर्गुणा |
हे दयानिधे श्रीगजानना || ११ ||
जिवन व्यर्थ हे तूज वेगळे |
स्वहित आपुले काम साधिले |
सुख नसे सदा मोहयातना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १२ ||
फारसे मला बोलता न ये |
पाउले तुझे देखिलीं स्वये |
मांडिली असे बहुत वल्गना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १३ ||
दीनबंधू हे ब्रीद आपुले |
साच तूं करीं दाविं पाउले |
मंगलालया विश्वजीवना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १४ ||
नाशिवंत रे सर्व संपदा |
हे नको मला पाव एकदा |
क्षेम देउनी चित्तरंजना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १५ ||
जातसे घडी पळ युगापरी |
लागली तुझी खंती अंतरी |
स्वामी आपुला विरह साहिना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १६ ||
कळेल तें करी विनविणे किती |
तारी अथवा मारीं गणपती |
सकलदोष अन संकष्टनाशना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १७ ||
आवडे मला त्रिभुवनाकृती |
पूजुनी बरी करीन आरती |
धांव पांव रे मोदकाशना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १८ ||
हृदय कठीण तूं न करि सर्वथा |
अंत आमुचा बघसी पुरता |
सिद्धिवल्लभा मूषकवाहना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || १९ ||
कल्पवृक्ष तू कामधेनु वा |
लाविजे स्तनीं जीविंच्या जिवा |
हाचि हेत रे शेषभूषणा |
हे दयानिधे श्रीगजानना || २० ||
गणपति तुझे नाम चांगले |
आवड़ी बहू चित्त रंगले |
प्रार्थना तुझी गौरीनंदना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || २१ ||
तारिं मोरया दुःखसागरीं |
गोसावीनंदन प्रार्थना करी |
आत्मया मनी जाण चिद्घना |
हे दयानिधे श्रीगजानना || २२ ||
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